श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  3.188.137 
तव देव शरीरस्था देवदानवराक्षसा:।
यक्षगन्धर्वनागाश्च जगत् स्थावरजङ्गमम्॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
हे भगवन्! देवता, दानव, यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, नाग तथा सम्पूर्ण चराचर जगत आपके शरीर में विद्यमान हैं।
 
God! Gods, demons, Yakshas, ​​Rakshasas, Gandharvas, Nagas and the entire movable and immovable world are present in your body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)