श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  3.188.136 
आस्येनानुप्रविष्टोऽहं शरीरे भगवंस्तव।
दृष्टवानखिलान् सर्वान् समस्तान् जठरे हि ते॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैंने आपके मुख द्वारा आपके शरीर में प्रवेश किया और आपके पेट में स्थित समस्त पदार्थों को देखा॥136॥
 
O Lord! I entered your body through your mouth and observed all the material things in your stomach.॥ 136॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)