Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.133-134: उस अनन्त तेजोमय बालकका अनन्त प्रभाव देखकर मैं बड़ी सावधानीसे उसके समीप गया और विनीत भावसे हाथ जोड़कर मैंने उन कमलनेत्रवाले भगवान् को देखा जो सम्पूर्ण प्राणियोंके आत्मा हैं॥133-134॥ | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस अनन्त तेजोमय बालकका अनन्त प्रभाव देखकर मैं बड़ी सावधानीसे उसके समीप गया और विनीत भावसे हाथ जोड़कर मैंने उन कमलनेत्रवाले भगवान् को देखा जो सम्पूर्ण प्राणियोंके आत्मा हैं॥133-134॥
Having seen the infinite influence of that infinitely radiant child, I very carefully went near him and with folded hands in a humble mood, I saw that lotus-eyed God who is the soul of all beings.॥ 133-134॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥