Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.127-128: हे राजन! जब मैं बाहर आया तो मैंने देखा कि वही अमर बालक श्रीवत्स चिन्ह से सुशोभित होकर उसी वटवृक्ष की शाखा पर उसी बालवेश में बैठा हुआ है और अपने गर्भ में सम्पूर्ण जगत् को धारण किए हुए है। 127-128॥ | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! जब मैं बाहर आया तो मैंने देखा कि वही अमर बालक श्रीवत्स चिन्ह से सुशोभित होकर उसी वटवृक्ष की शाखा पर उसी बालवेश में बैठा हुआ है और अपने गर्भ में सम्पूर्ण जगत् को धारण किए हुए है। 127-128॥
The best king! When I came out, I saw that the same immortal child, adorned with the symbol of Srivatsa, was sitting on the same banyan branch in the same childlike attire, carrying the entire world in his womb. 127-128॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥