श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  3.188.118 
कुक्षौ तस्य नरव्याघ्र प्रविष्ट: संचरन् दिश:।
शक्रादींश्चापि पश्यामि कृत्स्नान् देवगणानहम्॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! उस बालक के गर्भ में प्रवेश करके सब दिशाओं में विचरण करते हुए इन्द्र सहित सब देवता भी देखे गए।।118।।
 
O best of men! Entering the womb of that child and roaming in all directions, all the gods including Indra were also seen. 118.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)