श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.188.11 
तस्मात् तवान्तको मृत्युर्जरा वा देहनाशिनी।
न त्वां विशति विप्रर्षे प्रसादात् परमेष्ठिन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इसलिये सबको मारने वाली और शरीर को जीर्ण-शीर्ण करने वाली मृत्यु तुम्हें स्पर्श नहीं करती। ब्रह्मर्षे! इसका कारण भगवान परमेष्ठी की कृपा है। 11॥
 
That is why death, which kills everyone and makes the body dilapidated, does not touch you. Brahmarshe! The reason for this is the grace of Lord Parmeshthi. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)