श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.188.108 
तत्र पश्यामि गगनं चन्द्रसूर्यविराजितम्।
जाज्वल्यमानं तेजोभि: पावकार्कसमप्रभम्॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मैंने चन्द्रमा और सूर्यसे सुशोभित आकाश देखा, जो अनन्त कांतिसे प्रकाशित हो रहा था और अग्नि और सूर्यके समान देदीप्यमान था ॥108॥
 
There I saw the sky adorned with the moon and the sun, which was blazing with infinite brightness and resplendent like fire and the sun. 108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)