श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 102-106
 
 
श्लोक  3.188.102-106 
गङ्गां शतद्रुं सीतां च यमुनामथ कौशिकीम्।
चर्मण्वतीं वेत्रवतीं चन्द्रभागां सरस्वतीम्॥ १०२॥
सिन्धुं चैव विपाशां च नदीं गोदावरीमपि।
वस्वोकसारां नलिनीं नर्मदां चैव भारत॥ १०३॥
नदीं ताम्रां च वेणां च पुण्यतोयां शुभावहाम्।
सुवेणां कृष्णवेणां च इरामां च महानदीम्॥ १०४॥
वितस्तां च महाराज कावेरीं च महानदीम्।
शोणं च पुरुषव्याघ्र विशल्यां किम्पुनामपि॥ १०५॥
एताश्चान्याश्च नद्योऽहं पृथिव्यां या नरोत्तम।
परिक्रामन् प्रपश्यामि तस्य कुक्षौ महात्मन:॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! फिर मैं उस महान् बालक के पेट में घूमने लगा। वहां घूमते हुए मैंने गंगा, सतलुज, सीता, यमुना, कोसी, चंबल, वेत्रवती, चिनाव, सरस्वती, सिंधु, व्यास, गोदावरी, वासवोक्सरा, नलिनी, नर्मदा, ताम्रपर्णी, वेना, शुभदायिनी पुण्यतोया, सुवेना, कृष्णावेणा, महानदी इरमा, वितस्ता (झेलम), महानदी कावेरी, शोणभद्र, विशल्या और किंपुना देखीं। सबको देखा और इस धरती की अन्य नदियों को भी। 102—106॥
 
Narashrestha! Then I started roaming in the stomach of that great child. While roaming there, I saw Ganga, Sutlej, Sita, Yamuna, Kosi, Chambal, Vetravati, Chenav, Saraswati, Indus, Vyas, Godavari, Vasvoksara, Nalini, Narmada, Tamraparni, Vena, Shubhadayini Punyatoya, Suvena, Krishnavena, Mahanadi Irama, Vitasta (Jhelum), Mahanadi Kaveri, Shonbhadra, Vishalya and Kimpuna. Saw everyone and also the other rivers on this earth. 102—106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)