श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  3.188.101 
तत: प्रविष्टस्तत्कुक्षिं सहसा मनुजाधिप।
सराष्ट्रनगराकीर्णां कृत्स्नां पश्यामि मेदिनीम्॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
राजा! उसमें प्रवेश करते ही मैं अचानक उस बालक के पेट में पहुँच गया। वहाँ मैंने सारी पृथ्वी को सब राष्ट्रों और नगरों से भरा हुआ देखा॥101॥
 
King! As soon as I entered it, I suddenly reached the stomach of that child. There I saw the whole earth filled with all the nations and cities.॥ 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)