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mahabharat 3.187.9: ‘इसीलिए मैं इस महान भय सागर में डूब रहा हूँ। कृपया मुझे बचाने के लिए विशेष प्रयत्न करें। मैं आपकी कृपा का बदला चुकाऊँगा।’॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.187.9 
तस्माद् भयौघान्महतो मज्जन्तं मां विशेषत:।
त्रातुमर्हसि कर्तास्मि कृते प्रतिकृतं तव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘इसीलिए मैं इस महान भय सागर में डूब रहा हूँ। कृपया मुझे बचाने के लिए विशेष प्रयत्न करें। मैं आपकी कृपा का बदला चुकाऊँगा।’॥9॥
 
‘That is why I am drowning in this great sea of ​​fear. Please make special efforts to save me. I will reciprocate your kindness.’॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)