Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.187.38-40: शत्रु नगर को जीतनेवाले नरेश्वर ! तत्पश्चात मनु ने भगवान मत्स्य का चिंतन किया । यह जानकर श्रृंगी भगवान मत्स्य शीघ्र ही वहाँ पहुँचे । भरतकुल के श्रेष्ठ नेता ! श्रृंगी भगवान को अपने पूर्व रूप में ऊँचे पर्वत के रूप में समुद्र में प्रकट होते देख उन्होंने उनके सिर पर लगे श्रृंगी से एक बँटी हुई रस्सी बाँध दी । 38-40॥ | mahabharat अध्याय 3.187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रु नगर को जीतनेवाले नरेश्वर ! तत्पश्चात मनु ने भगवान मत्स्य का चिंतन किया । यह जानकर श्रृंगी भगवान मत्स्य शीघ्र ही वहाँ पहुँचे । भरतकुल के श्रेष्ठ नेता ! श्रृंगी भगवान को अपने पूर्व रूप में ऊँचे पर्वत के रूप में समुद्र में प्रकट होते देख उन्होंने उनके सिर पर लगे श्रृंगी से एक बँटी हुई रस्सी बाँध दी । 38-40॥
Nareshwar conqueror of enemy city! Thereafter Manu contemplated Lord Matsya. Knowing this, the horned Lord Matsya quickly reached there. The best leader of Bharatkul! Seeing the Horned Fish Lord appearing in the sea in the form of a tall mountain in his earlier form, he tied a divided rope to the horn on his head. 38-40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥