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mahabharat 3.187.30: समस्त चल और अचल वस्तुओं के लिए, जो चल सकते हैं और जो नहीं चल सकते, उन सबके लिए भी बड़ा भयंकर समय आ गया है॥30॥   |   mahabharat अध्याय 3.187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.187.30 
त्रसानां स्थावराणां च यच्चेङ्गं यच्च नेङ्गति।
तस्य सर्वस्य सम्प्राप्त: काल: परमदारुण:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
समस्त चल और अचल वस्तुओं के लिए, जो चल सकते हैं और जो नहीं चल सकते, उन सबके लिए भी बड़ा भयंकर समय आ गया है॥30॥
 
A very dreadful time has arrived for all movable and immovable objects, both for those who can move and those who cannot move.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)