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mahabharat 3.187.3: वह बालक मनु अपने तेज, तेज, कांति और विशेष रूप से तप द्वारा अपने पिता भगवान सूर्य और दादा महर्षि कश्यप से भी आगे निकल गया॥3॥   |   mahabharat अध्याय 3.187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.187.3 
ओजसा तेजसा लक्ष्म्या तपसा च विशेषत:।
अतिचक्राम पितरं मनु: स्वं च पितामहम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह बालक मनु अपने तेज, तेज, कांति और विशेष रूप से तप द्वारा अपने पिता भगवान सूर्य और दादा महर्षि कश्यप से भी आगे निकल गया॥3॥
 
That child Manu surpassed his father Lord Surya and grandfather Maharishi Kashyap through energy, brilliance, radiance and especially penance. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)