Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.187.25: महाराज! यद्यपि वह मछली बहुत बड़ी थी, फिर भी जब मनु उसे उठाने लगे, तो वह ऐसी हो गई कि उसे आसानी से उठाया जा सकता था। उसका स्पर्श और गंध दोनों ही मनु को बहुत अच्छे लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.187.25 
सुमहानपि मत्स्यस्तु स मनोर्नयतस्तदा।
आसीद् यथेष्टहार्यश्च स्पर्शगन्धसुखस्य वै॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यद्यपि वह मछली बहुत बड़ी थी, फिर भी जब मनु उसे उठाने लगे, तो वह ऐसी हो गई कि उसे आसानी से उठाया जा सकता था। उसका स्पर्श और गंध दोनों ही मनु को बहुत अच्छे लगे।
 
King! Although that fish was very large, yet when Manu started carrying it, it became such that it could be carried easily. Both its touch and smell were very pleasant to Manu. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)