श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 186: तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.186.6 
तत्र स्म रम्या विपुला विशोका:
सुपुष्पिता: पुष्करिण्य: सुपुण्या:।
अकर्दमा मीनवत्य: सुतीर्था
हिरण्मयैरावृता: पुण्डरीकै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सुन्दर, विशाल, शोकरहित, अत्यन्त पवित्र और सुन्दर पुष्पों से सुशोभित छोटे-छोटे सरोवर हैं। उनमें कीचड़ का लेश भी नहीं है। उनमें मछलियाँ रहती हैं। उन सरोवरों में उतरने के लिए सुन्दर सीढ़ियाँ हैं और वे सभी सरोवर स्वर्णिम कमल पुष्पों से आच्छादित हैं॥6॥
 
There are beautiful, large, grief-free, extremely pure and small lakes decorated with beautiful flowers. There is no trace of mud in them. Fishes live in them. There are beautiful stairs to go down in those lakes and all those lakes are covered with golden lotus flowers.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)