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mahabharat 3.186.23: तार्क्ष्य ने पूछा - सुप्रभात! आपके समान कोई अन्य स्त्री नहीं है। आप देवी लक्ष्मीजी के समान अत्यंत तेजस्वी हैं। आपका यह परम तेजस्वी रूप अत्यंत दिव्य है। इसके अतिरिक्त, आप दिव्य बुद्धि से युक्त हैं (इसका क्या कारण है?)॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.186: तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.186.23 
तार्क्ष्य उवाच
न हि त्वया सदृशी काचिदस्ति
विभ्राजसे ह्यतिमात्रं यथा श्री:।
रूपं च ते दिव्यमनन्तकान्ति
प्रज्ञां च देवीं सुभगे बिभर्षि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तार्क्ष्य ने पूछा - सुप्रभात! आपके समान कोई अन्य स्त्री नहीं है। आप देवी लक्ष्मीजी के समान अत्यंत तेजस्वी हैं। आपका यह परम तेजस्वी रूप अत्यंत दिव्य है। इसके अतिरिक्त, आप दिव्य बुद्धि से युक्त हैं (इसका क्या कारण है?)॥ 23॥
 
Tarkshya asked – Good morning! There is no other woman like you. You look very luminous like Goddess Lakshmiji. This most radiant form of yours is extremely divine. Besides, you also possess divine intelligence (what is the reason for this?)॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)