Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.186.18: सरस्वती बोलीं - मुनि! जो व्यक्ति अशुद्ध है, जिसने हाथ-पैर नहीं धोए हैं, जो वेदों के ज्ञान से वंचित है, जिसे वेदों के अर्थ का अनुभव नहीं है, ऐसे व्यक्ति को अग्नि में आहुति नहीं देनी चाहिए। देवता दूसरों के भाव जानना चाहते हैं, वे पवित्रता चाहते हैं, इसलिए वे श्रद्धाहीन व्यक्ति द्वारा दी गई आहुति को स्वीकार नहीं करते॥18॥ | mahabharat अध्याय 3.186: तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सरस्वत्युवाच
न चाशुचिर्नाप्यनिर्णिक्तपाणि-
र्नाब्रह्मविज्जुहुयान्नाविपश्चित्।
बुभुत्सव: शुचिकामा हि देवा
नाश्रद्दधानाद्धि हविर्जुषन्ति॥ १८॥
अनुवाद
सरस्वती बोलीं - मुनि! जो व्यक्ति अशुद्ध है, जिसने हाथ-पैर नहीं धोए हैं, जो वेदों के ज्ञान से वंचित है, जिसे वेदों के अर्थ का अनुभव नहीं है, ऐसे व्यक्ति को अग्नि में आहुति नहीं देनी चाहिए। देवता दूसरों के भाव जानना चाहते हैं, वे पवित्रता चाहते हैं, इसलिए वे श्रद्धाहीन व्यक्ति द्वारा दी गई आहुति को स्वीकार नहीं करते॥18॥
Saraswati said - Muni! A person who is impure, who has not washed his hands and feet, who is deprived of the knowledge of Vedas, who has no experience of the meaning of Vedas, such a person should not offer sacrifice in the fire. Gods want to know the feelings of others, they want purity, hence they do not accept the offerings given by a person without faith.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥