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श्लोक 3.185.36  |
तदत्रिर्न्यायत: सर्वं प्रतिगृह्याभिसत्कृत:।
प्रत्युज्जगाम तेजस्वी गृहानेव महातपा:॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| तदनन्तर महातपस्वी एवं तेजस्वी ऋषि अत्रि राजा पर प्रसन्न होकर न्यायपूर्वक प्राप्त समस्त धन को लेकर उसके घर चले गए ॥36॥ |
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| Then the great ascetic and brilliant sage Atri, being pleased with the king, went to his home with all the wealth he had received justly. 36॥ |
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