Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.185.27-29: प्रजापति, विराट, सम्राट, क्षत्रिय, भूपति, नृप आदि शब्दों से स्तुति किए जाने वाले राजा की पूजा कौन नहीं करेगा? राजा का वर्णन इन नामों से किया गया है - पुरयोनि (प्रथम कारण), युद्धजित (युद्ध में विजयी), अभिय (रक्षा के लिए सर्वत्र भ्रमण करने वाला), मुदित (सुखी), भव (देवता), स्वर्णेता (स्वर्ग को प्राप्त करने वाला), सहजित (तुरंत विजय प्राप्त करने वाला) और बभ्रु (विष्णु)। राजा सत्य का कारण, प्राचीन बातों को जानने वाला और लोगों को सत्य धर्म के पालन में प्रेरित करने वाला होता है। अधर्म से भयभीत होकर ऋषियों ने भी क्षत्रियों में अपना ब्रह्मबल स्थापित किया था॥27-29॥ | mahabharat अध्याय 3.185: ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रजापति, विराट, सम्राट, क्षत्रिय, भूपति, नृप आदि शब्दों से स्तुति किए जाने वाले राजा की पूजा कौन नहीं करेगा? राजा का वर्णन इन नामों से किया गया है - पुरयोनि (प्रथम कारण), युद्धजित (युद्ध में विजयी), अभिय (रक्षा के लिए सर्वत्र भ्रमण करने वाला), मुदित (सुखी), भव (देवता), स्वर्णेता (स्वर्ग को प्राप्त करने वाला), सहजित (तुरंत विजय प्राप्त करने वाला) और बभ्रु (विष्णु)। राजा सत्य का कारण, प्राचीन बातों को जानने वाला और लोगों को सत्य धर्म के पालन में प्रेरित करने वाला होता है। अधर्म से भयभीत होकर ऋषियों ने भी क्षत्रियों में अपना ब्रह्मबल स्थापित किया था॥27-29॥
Who would not worship a king who is praised with words like Prajapati, Virat, Samrat, Kshatriya, Bhupati, Nrip etc.? The king is described by these names - Purayoni (first cause), Yudhajit (victorious in battle), Abhiya (one who travels everywhere for protection), Mudit (happy), Bhava (God), Swarneta (one who attains heaven), Sahajit (one who wins instantly) and Babhru (Vishnu). The king is the cause of truth, the one who knows the ancient things and the one who inspires people to follow the true religion. Fearing unrighteousness, the sages had also established their Brahmabal among the Kshatriyas. 27-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥