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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 185: ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  3.185.25-26 
सनत्कुमार उवाच
ब्रह्म क्षत्रेण सहितं क्षत्रं च ब्रह्मणा सह।
संयुक्तौ दहत: शत्रून् वनानीवाग्निमारुतौ॥ २५॥
राजा वै प्रथितो धर्म: प्रजानां पतिरेव च।
स एव शक्र: शुक्रश्च स धाता च बृहस्पति:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सनत्कुमार ने कहा- यदि ब्राह्मण क्षत्रियों के साथ और क्षत्रिय ब्राह्मणों के साथ मिल जाएँ, तो वे मिलकर अपने शत्रुओं को उसी प्रकार जला डालते हैं, जैसे अग्नि और वायु मिलकर अनेक वनों को जलाकर राख कर देते हैं। राजा अपने धर्म के लिए प्रसिद्ध है। वह प्रजापति, इंद्र, शुक्राचार्य, धाता और बृहस्पति भी है। 25-26.
 
Sanatkumara said- If Brahmins unite with Kshatriyas and Kshatriyas with Brahmins, then together they burn their enemies in the same way as fire and wind, working together, burn many forests to ashes. The king is famous for his Dharma. He is also Prajapati, Indra, Shukracharya, Dhata and Brihaspati. 25-26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)