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mahabharat 3.185.20-21: इन दोनों को राजा पृथु की यज्ञवेदी में किसने प्रवेश करने दिया है? ये दोनों यहाँ खड़े होकर ऊँची आवाज़ में बातें और झगड़ा क्यों कर रहे हैं?’ उस समय परम पुण्यात्मा और सर्वधर्म ज्ञाता कणाद ने सभी सभासदों से कहा कि ये दोनों किसी विषय पर आपस में बहस कर रहे हैं और उसी का निर्णय करने के लिए यहाँ आये हैं।’   |   mahabharat अध्याय 3.185: ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 185: ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  3.185.20-21 
प्रवेश: केन दत्तोऽयमुभयोर्वैन्यसंसदि।
उच्चै: समभिभाषन्तौ केन कार्येण धिष्ठितौ॥ २०॥
तत: परमधर्मात्मा काश्यप: सर्वधर्मवित्।
विवादिनावनुप्राप्तौ तावुभौ प्रत्यवेदयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इन दोनों को राजा पृथु की यज्ञवेदी में किसने प्रवेश करने दिया है? ये दोनों यहाँ खड़े होकर ऊँची आवाज़ में बातें और झगड़ा क्यों कर रहे हैं?’ उस समय परम पुण्यात्मा और सर्वधर्म ज्ञाता कणाद ने सभी सभासदों से कहा कि ये दोनों किसी विषय पर आपस में बहस कर रहे हैं और उसी का निर्णय करने के लिए यहाँ आये हैं।’
 
Who has allowed these two to enter the sacrificial altar of King Prithu? Why are these two standing here, talking loudly and quarreling?' At that time, Kanada, the most pious soul and the knower of all religions, told all the members that these two are arguing with each other on some issue and have come here for a decision on the same.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)