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mahabharat 3.185.14: बड़े-बड़े ऋषिगण आपकी स्तुति करते हैं। आपके अतिरिक्त कोई दूसरा राजा धर्म को नहीं जानता। यह सुनकर महातपस्वी गौतम मुनि क्रोधित होकर बोले ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.185: ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 185: ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.185.14 
स्तुवन्ति त्वां मुनिगणास्त्वदन्यो नास्ति धर्मवित्।
तमब्रवीदृषि: क्रुद्धो वचनं वै महातपा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
बड़े-बड़े ऋषिगण आपकी स्तुति करते हैं। आपके अतिरिक्त कोई दूसरा राजा धर्म को नहीं जानता। यह सुनकर महातपस्वी गौतम मुनि क्रोधित होकर बोले ॥14॥
 
The great sages praise you. No other king apart from you knows the Dharma. Hearing this, the great ascetic Gautam Muni became angry and said: ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)