Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.185.1: मार्कण्डेय कहते हैं, "हे राजन! ब्राह्मणों का माहात्म्य मुझसे सुनिए। पूर्वकाल में वेन के पुत्र राजर्षि पृथु ने, जो यहाँ वैन्य नाम से प्रसिद्ध थे, एक बार अश्वमेध यज्ञ करने की दीक्षा ली थी। | mahabharat अध्याय 3.185: ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेय कहते हैं, "हे राजन! ब्राह्मणों का माहात्म्य मुझसे सुनिए। पूर्वकाल में वेन के पुत्र राजर्षि पृथु ने, जो यहाँ वैन्य नाम से प्रसिद्ध थे, एक बार अश्वमेध यज्ञ करने की दीक्षा ली थी।
Markandeya says, "O King! Listen to me about the greatness of Brahmins. In the past, Ven's son, Rajarshi Prithu, who was famous here by the name of Vainya, once took initiation in performing Ashwamedha Yagna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥