श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 184: तपस्वी तथा स्वधर्मपरायण ब्राह्मणोंका माहात्म्य  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.184.12 
ते तु तत् सर्वमखिलमाख्यायास्मै यथातथम्।
नापश्यंस्तमृषिं तत्र गतासुं ते समागता:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उसके इस प्रकार पूछने पर क्षत्रियों ने उसे ऋषि के वध का सारा वृत्तांत सुनाया और उसे अपने साथ उस स्थान पर ले गए जहाँ ऋषि का वध हुआ था। परन्तु वहाँ उन्हें ऋषि का शव दिखाई नहीं दिया॥12॥
 
On his asking in this manner, the Kshatriyas told him the entire story of the sage's murder and took him along with them to the place where the sage had been killed. But they did not see the dead body of the sage there.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)