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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन
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श्लोक 85
श्लोक
3.183.85
ऋषयस्ते महात्मान: प्रत्यक्षागमबुद्धय:।
कर्मभूमिमिमां प्राप्य पुनर्यान्ति सुरालयम्॥ ८५॥
अनुवाद
वे लौकिक और शास्त्रीय ज्ञान प्रकट करने वाले महान् ऋषिगण इस कर्मभूमि में आकर फिर देवलोक को चले जाते हैं ॥85॥
Those great sages who reveal worldly and classical knowledge come to this land of work and then go to the world of gods. 85॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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