Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.183.81-82: ज्ञानी पुरुष तपस्वी, सम्पूर्ण शास्त्रों के स्वाध्याय में तत्पर, व्रतों के पालन में दृढ़, सत्य परायण, गुरु की सेवा में तत्पर, विनयशील, सात्विक, क्षमाशील, जितेन्द्रिय और अत्यन्त तेजस्वी होते हैं। वे शुद्ध योनि में उत्पन्न होते हैं और प्रायः शुभ लक्षणों से विभूषित होते हैं। 81-82॥ | mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्ञानी पुरुष तपस्वी, सम्पूर्ण शास्त्रों के स्वाध्याय में तत्पर, व्रतों के पालन में दृढ़, सत्य परायण, गुरु की सेवा में तत्पर, विनयशील, सात्विक, क्षमाशील, जितेन्द्रिय और अत्यन्त तेजस्वी होते हैं। वे शुद्ध योनि में उत्पन्न होते हैं और प्रायः शुभ लक्षणों से विभूषित होते हैं। 81-82॥
A knowledgeable person is an ascetic, ready to self-study all the scriptures, steadfast in observing fasts, faithful to the truth, engaged in the service of the Guru, polite, of Shukla caste (Sattvik), forgiving, Jitendriya and very bright. They are born in a pure vagina and are often adorned with auspicious traits. 81-82॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥