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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 68h
 
 
श्लोक  3.183.68h 
आसन् वर्षसहस्रीयास्तथा पुत्रसहस्रिण:।
 
 
अनुवाद
उनकी आयु हजारों वर्ष की थी और उन्होंने हजारों पुत्र उत्पन्न किये।
 
His lifespan was thousands of years and he produced thousands of sons. 67 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)