Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.183.67: देवताओं और महर्षियों के समुदाय का उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन था। वे समस्त धर्मों का वर्णन करते थे, इन्द्रिय-सम्पन्न थे और ईर्ष्या से रहित थे ॥67॥   |   mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.183.67 
द्रष्टारो देवसङ्घानामृषीणां च महात्मनाम्।
प्रत्यक्षा: सर्वधर्माणां दान्ता विगतमत्सरा:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
देवताओं और महर्षियों के समुदाय का उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन था। वे समस्त धर्मों का वर्णन करते थे, इन्द्रिय-सम्पन्न थे और ईर्ष्या से रहित थे ॥67॥
 
He had direct vision of the community of gods and great sages. He explained all the religions, was full of senses and was free from jealousy. 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)