श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  3.183.61 
मार्कण्डेय उवाच
त्वद्युक्तोऽयमनुप्रश्नो यथावद् वदतां वर।
विदितं वेदितव्यं ते स्थित्यर्थं त्वं तु पृच्छसि॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय बोले, "वक्ताओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर! आपका प्रश्न सत्य और युक्तिसंगत है। आप जानने योग्य सब कुछ जानते हैं, फिर भी आप लोक-मर्यादा की रक्षा के लिए ही यह प्रश्न पूछ रहे हैं।"
 
Markandeya said, "Yudhishthira, the best of speakers! Your question is true and reasonable. You know everything worth knowing, yet you are asking this question only to protect public dignity." 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)