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mahabharat 3.183.52: जब उन्होंने आज्ञा दी, तब ब्राह्मणों सहित पाण्डव उनकी बात सुनने के लिए शान्त हो गये और उन महर्षियों की ओर देखने लगे, जो मध्यान्ह के सूर्य के समान तेजस्वी थे।   |   mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.183.52 
एवमुक्ता: क्षणं चक्रु: पाण्डवा: सह तैर्द्विजै:।
मध्यन्दिने यथाऽऽदित्यं प्रेक्षन्तस्ते महामुनिम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जब उन्होंने आज्ञा दी, तब ब्राह्मणों सहित पाण्डव उनकी बात सुनने के लिए शान्त हो गये और उन महर्षियों की ओर देखने लगे, जो मध्यान्ह के सूर्य के समान तेजस्वी थे।
 
After he commanded them, the Pandavas along with the Brahmins became quiet to listen to his speech, looking at those great sages who were as radiant as the midday Sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)