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mahabharat 3.183.5: एक और शुभ समाचार है । स्वाध्याय और तपस्या में तत्पर रहने वाले अमर एवं महातपस्वी मुनि मार्कण्डेय शीघ्र ही आप सभी से मिलेंगे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.183.5 
बहुवत्सरजीवी च मार्कण्डेयो महातपा:।
स्वाध्यायतपसा युक्त: क्षिप्रं युष्मान् समेष्यति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
एक और शुभ समाचार है । स्वाध्याय और तपस्या में तत्पर रहने वाले अमर एवं महातपस्वी मुनि मार्कण्डेय शीघ्र ही आप सभी से मिलेंगे ॥5॥
 
There is one more good news. The immortal and great ascetic Muni Mārkaṇḍeya, who is always engaged in self-study and austerity, will soon meet you all. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)