श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.183.48 
तमप्यथ महात्मानं सर्वे ते पुरुषर्षभा:।
पाद्यार्घ्याभ्यां यथान्यायमुपतस्थुर्मनीषिण:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तब उन सभी महामुनियों ने जल आदि अर्पण करके महामुनि नारद का सत्कार किया ॥48॥
 
Then all those great wise men honoured the great sage Narada by offering him water and other water. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)