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वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब सब लोग वहाँ बैठे थे, तब शुद्ध हृदय वाले नारद मुनि भी पाण्डवों से मिलने के लिए वहाँ आये।
Vaishmpayana says - Janamejaya! While all the people were sitting there, the sage Narada, who had a pure heart, also came there to meet the Pandavas. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥