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mahabharat 3.183.38: केशव! इसमें कोई संदेह नहीं कि आप ही पाण्डवों के एकमात्र आधार हैं। हम सभी कुन्तीपुत्र आपकी शरण में हैं। समय आने पर आप पुनः अपने वचनों के अनुसार ही सब कुछ करेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.183.38 
असंशयं केशव पाण्डवानां
भवान् गतिस्त्वच्छरणा हि पार्था:।
कालोदये तच्च ततश्च भूय:
कर्ता भवान् कर्म न संशयोऽस्ति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
केशव! इसमें कोई संदेह नहीं कि आप ही पाण्डवों के एकमात्र आधार हैं। हम सभी कुन्तीपुत्र आपकी शरण में हैं। समय आने पर आप पुनः अपने वचनों के अनुसार ही सब कुछ करेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।
 
Keshav! There is no doubt that you are the only support of the Pandavas. All of us sons of Kunti are in your refuge. When the time comes, you will again do everything according to your words, there is no doubt about it. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)