Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.183.27: 'तुम उन बालकों को वही नैतिक शिक्षा दे सकते हो जो आर्या कुन्ती उन्हें दे सकती हैं। सुभद्रा में भी उन्हें वही शिक्षा देने की क्षमता है। वह बड़ी सावधानी से वही शिक्षा प्रदान करती है और उन सभी बालकों को नीति के मार्ग पर स्थापित करती है।॥27॥ | mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा त्वमेवार्हसि तेषु वृत्तं
प्रयोक्तुमार्या च तथैव कुन्ती।
तेष्वप्रमादेन तथा करोति
तथैव भूयश्च तथा सुभद्रा॥ २७॥
अनुवाद
'तुम उन बालकों को वही नैतिक शिक्षा दे सकते हो जो आर्या कुन्ती उन्हें दे सकती हैं। सुभद्रा में भी उन्हें वही शिक्षा देने की क्षमता है। वह बड़ी सावधानी से वही शिक्षा प्रदान करती है और उन सभी बालकों को नीति के मार्ग पर स्थापित करती है।॥27॥
‘You can teach those children the same kind of moral education that Arya Kunti can give them. Subhadra also has the ability to give them the same kind of education. She imparts the same education with great care and establishes all those children in the path of morality.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥