Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.183.23-24: तत्पश्चात्, अपने मित्रों से घिरे हुए दशार्हवंश के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण ने यज्ञसेन की पुत्री द्रौपदी से कहा, 'कृष्ण! यह बड़े हर्ष की बात है कि अर्जुन से मिलकर तुम्हारी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गईं। तुम्हारे पुत्र बड़े ही सुशील हैं। धनुर्वेद में उनकी विशेष रुचि है। वे अपने मित्रों के साथ सत्पुरुषों के आचरण और धर्म का पालन करते हैं।॥ 23-24॥ | mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, अपने मित्रों से घिरे हुए दशार्हवंश के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण ने यज्ञसेन की पुत्री द्रौपदी से कहा, 'कृष्ण! यह बड़े हर्ष की बात है कि अर्जुन से मिलकर तुम्हारी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गईं। तुम्हारे पुत्र बड़े ही सुशील हैं। धनुर्वेद में उनकी विशेष रुचि है। वे अपने मित्रों के साथ सत्पुरुषों के आचरण और धर्म का पालन करते हैं।॥ 23-24॥
After this, Lord Krishna, the lord of the Dasarha clan, who was surrounded by his friends, said to Draupadi, the daughter of Yagyasena, 'Krishna! It is a matter of great joy that all your wishes have been fulfilled by meeting Arjun. Your sons are very well behaved. They have special interest in Dhanurveda. They, along with their friends, follow the good conduct and religion practised by good men.॥ 23-24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥