श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.183.22 
धौम्यं च भीमं च युधिष्ठिरं च
यमौ च कृष्णां च दशार्हसिंह:।
उवाच दिष्ट्या भवतां शिवेन
प्राप्त: किरीटी मुदित: कृतास्त्र:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात युदुकुलसिंह भगवान श्रीकृष्ण ने धौम्य, युधिष्ठिर, भीमसेन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी की ओर देखकर कहा - 'यह सौभाग्य की बात है कि आप लोगों की शुभ कामनाओं के कारण किरीटधारी अर्जुन अस्त्रविद्या में निपुण होकर सानंद में लौट आए हैं।' 22॥
 
Thereafter Yudukul Singh Lord Shri Krishna looked towards Dhaumya, Yudhishthir, Bhimsen, Nakul, Sahadev and Draupadi and said - 'It is a matter of good fortune that due to the good wishes made by you, the crowned Arjun has returned to Sanand after becoming an expert in the art of weapons.' 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)