श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.183.15 
स पूजयित्वा मधुहा यथावत्
पार्थं च कृष्णां च पुरोहितं च।
उवाच राजानमभिप्रशंसन्
युधिष्ठिरं तत्र सहोपविश्य॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भगवान मधुसूदन ने अर्जुन, द्रौपदी और पुरोहित धौम्य का सत्कार करके उन सबके साथ बैठकर राजा युधिष्ठिर की प्रशंसा की और कहा: ॥15॥
 
Lord Madhusudana, after honouring Arjuna, Draupadi and the priest Dhaumya, sat with them all and praised King Yudhishthira and said: ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)