श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.183.14 
तत: समस्तानि किरीटमाली
वनेषु वृत्तानि गदाग्रजाय।
उक्त्वा यथावत् पुनरन्वपृच्छत्
कथं सुभद्रा च स चाभिमन्यु:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् किरीटधारी अर्जुन ने गदक के बड़े भाई भगवान श्रीकृष्ण को वनवास का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाकर उनसे पुनः पूछा - 'सुभद्रा और अभिमन्यु कैसे हैं?'॥14॥
 
Thereafter, crowned Arjuna, after narrating the entire story of exile to Lord Krishna, Gadka's elder brother, asked him again - 'How are Subhadra and Abhimanyu?' 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)