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mahabharat 3.183.12: तत्पश्चात् समस्त पाण्डवों ने अपनी-अपनी स्त्रियों और पुरोहितों के साथ कमलनेत्र भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की और वे सब उनके चारों ओर बैठ गए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.183.12 
ततस्ते पाण्डवा: सर्वे सभार्या: सपुरोहिता:।
आनर्चु: पुण्डरीकाक्षं परिवव्रुश्च सर्वश:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त पाण्डवों ने अपनी-अपनी स्त्रियों और पुरोहितों के साथ कमलनेत्र भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की और वे सब उनके चारों ओर बैठ गए॥12॥
 
Thereafter, all the Pandavas along with their wives and priests worshipped the lotus-eyed Lord Krishna and all of them sat around Him.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)