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mahabharat 3.182.18: फिर, कृष्णपक्ष के उदय होने पर, पाण्डव ऋषि धौम्य, सारथि और रसोई के प्रधान के साथ काम्यक वन की ओर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.182: वर्षा और शरद्-ऋतुका वर्णन एवं युधिष्ठिर आदिका पुन: द्वैतवनसे काम्यकवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.182.18 
तमिस्राभ्युदये तस्मिन् धौम्येन सह पाण्डवा:।
सूतै: पौरोगवैश्चैव काम्यकं प्रययुर्वनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
फिर, कृष्णपक्ष के उदय होने पर, पाण्डव ऋषि धौम्य, सारथि और रसोई के प्रधान के साथ काम्यक वन की ओर चल पड़े।
 
Then, with the rising of the dark fortnight, the Pandavas, accompanied by the sage Dhoumya, charioteers and the head of the kitchen, proceeded towards the Kamyak forest.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि काम्यकवनप्रवेशे द्वॺशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें काम्यकवनगमनविषयक

एक सौ बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)