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mahabharat 3.182.13: पाण्डवों ने देखा कि नदियाँ और तालाब कुमुदिनी और कमल के फूलों से सुशोभित हो रहे हैं, वे शीतल जल से भरे हुए हैं और सबको सुखदायक प्रतीत हो रहे हैं॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.182: वर्षा और शरद्-ऋतुका वर्णन एवं युधिष्ठिर आदिका पुन: द्वैतवनसे काम्यकवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 182: वर्षा और शरद्-ऋतुका वर्णन एवं युधिष्ठिर आदिका पुन: द्वैतवनसे काम्यकवनमें प्रवेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.182.13 
कुमुदै: पुण्डरीकैश्च शीतवारिधरा: शिवा:।
नदी: पुष्करिणीश्चैव ददृशु: समलंकृता:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों ने देखा कि नदियाँ और तालाब कुमुदिनी और कमल के फूलों से सुशोभित हो रहे हैं, वे शीतल जल से भरे हुए हैं और सबको सुखदायक प्रतीत हो रहे हैं॥13॥
 
The Pandavas saw that the rivers and ponds were decorated with lilies and lotus flowers. They were filled with cool water and appeared soothing to everyone.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)