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mahabharat 3.182.12: उस समय की रात्रियाँ धूल रहित और निर्मल प्रतीत होती थीं। वे बादलों के समान शीतल थीं। ग्रह-नक्षत्र और चन्द्रमा उनकी शोभा बढ़ा रहे थे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.182: वर्षा और शरद्-ऋतुका वर्णन एवं युधिष्ठिर आदिका पुन: द्वैतवनसे काम्यकवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.182.12 
दृश्यन्ते शान्तरजस: क्षपा जलदशीतला:।
ग्रहनक्षत्रसङ्घैश्च सोमेन च विराजिता:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस समय की रात्रियाँ धूल रहित और निर्मल प्रतीत होती थीं। वे बादलों के समान शीतल थीं। ग्रह-नक्षत्र और चन्द्रमा उनकी शोभा बढ़ा रहे थे॥12॥
 
The nights of that time appeared dust-free and clear. They were cool like the clouds. The constellations of planets and stars and the moon enhanced their beauty.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)