Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.181.8: युधिष्ठिर ने पूछा- सर्प! स्वर्ग की प्राप्ति और कर्मों के निश्चित फल को मनुष्य किस प्रकार देखता है तथा देह-चेतना से रहित पुरुष किस प्रकार गति करता है? इन विषयों को मुझसे भली-भाँति कहो॥8॥ | mahabharat अध्याय 3.181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
कथं स्वर्गे गति: सर्प कर्मणां च फलं ध्रुवम्।
अशरीरस्य दृश्येत प्रब्रूहि विषयांश्च मे॥ ८॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- सर्प! स्वर्ग की प्राप्ति और कर्मों के निश्चित फल को मनुष्य किस प्रकार देखता है तथा देह-चेतना से रहित पुरुष किस प्रकार गति करता है? इन विषयों को मुझसे भली-भाँति कहो॥8॥
Yudhishthir asked- Snake! How does a person see the attainment of heaven and the definite results of his actions and how does a man who is free from body-consciousness move? Tell me about these topics thoroughly. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥