Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.181.7: राजन! इस प्रकार उनका गौरव और गरिमा केवल कार्य की अपेक्षा से ही निर्धारित होती है। अब आप जो चाहें पूछिए। मैं यथाशक्ति उत्तर देता हूँ। 7॥ | mahabharat अध्याय 3.181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमेतद् भवेद् राजन् कार्यापेक्षमनन्तरम्।
यदभिप्रेतमन्यत् ते ब्रूहि यावद् ब्रवीम्यहम्॥ ७॥
अनुवाद
राजन! इस प्रकार उनका गौरव और गरिमा केवल कार्य की अपेक्षा से ही निर्धारित होती है। अब आप जो चाहें पूछिए। मैं यथाशक्ति उत्तर देता हूँ। 7॥
Rajan! In this way, their pride and dignity is determined only by the expectation of work. Now ask whatever question you want. I answer as best I can. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥