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mahabharat 3.181.42-43: राजन! मुझे उनके ब्रह्मज्ञान और ब्राह्मणत्व को देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। इसीलिए मैंने आपसे पहले ही इस विषय में पूछा था। राजन! सत्य, संयम, तप, दान, अहिंसा और धर्म-परायणता - ये ही गुण हैं जो मनुष्यों को सदैव सफलता दिलाते हैं, न कि जाति और वंश। यहाँ आपके भाई महाबली भीमसेन हैं, जो पूर्णतः सुरक्षित हैं। महाराज! आपकी कृपा हो, अब मैं स्वर्ग वापस जाऊँगा। 42-43।   |   mahabharat अध्याय 3.181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  3.181.42-43 
ब्रह्म च ब्राह्मणत्वं च येन त्वाहमचूचुदम्।
सत्यं दमस्तपो दानमहिंसा धर्मनित्यता॥ ४२॥
साधकानि सदा पुंसां न जातिर्न कुलं नृप।
अरिष्ट एष ते भ्राता भीमसेनो महाबल:।
स्वस्ति तेऽस्तु महाराज गमिष्यामि दिवं पुन:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
राजन! मुझे उनके ब्रह्मज्ञान और ब्राह्मणत्व को देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। इसीलिए मैंने आपसे पहले ही इस विषय में पूछा था। राजन! सत्य, संयम, तप, दान, अहिंसा और धर्म-परायणता - ये ही गुण हैं जो मनुष्यों को सदैव सफलता दिलाते हैं, न कि जाति और वंश। यहाँ आपके भाई महाबली भीमसेन हैं, जो पूर्णतः सुरक्षित हैं। महाराज! आपकी कृपा हो, अब मैं स्वर्ग वापस जाऊँगा। 42-43।
 
King! I was very surprised to see his knowledge of Brahman and his brahminhood. That is why I had asked you about this earlier. King! Truth, self-control, austerity, charity, non-violence and devotion to religion - these virtues are the ones that always help men achieve success, not caste and lineage. Here is your brother, the mighty Bhimasena, who is completely safe. Maharaj! May you be blessed, now I will go back to heaven. 42-43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)