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युधिष्ठिर उवाच
दानाद् वा सर्प सत्याद् वा किमतो गुरु दृश्यते।
अहिंसाप्रिययोश्चैव गुरुलाघवमुच्यताम्॥ ३॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - सर्पराज! दान और सत्य में से कौन अधिक महत्वपूर्ण है? अहिंसा और मधुर वचन - इनमें से कौन अधिक महत्वपूर्ण है और कौन कम? बताइए।
Yudhishthira asked - King of snakes! Which is more important among charity and truth? Non-violence and sweet words - which of these is more important and which is less important? Tell me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥