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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.181.3 
युधिष्ठिर उवाच
दानाद् वा सर्प सत्याद् वा किमतो गुरु दृश्यते।
अहिंसाप्रिययोश्चैव गुरुलाघवमुच्यताम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - सर्पराज! दान और सत्य में से कौन अधिक महत्वपूर्ण है? अहिंसा और मधुर वचन - इनमें से कौन अधिक महत्वपूर्ण है और कौन कम? बताइए।
 
Yudhishthira asked - King of snakes! Which is more important among charity and truth? Non-violence and sweet words - which of these is more important and which is less important? Tell me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)