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mahabharat 3.181.23: बुद्धि की परवर्ती अवस्थाओं में भी विद्वान् पुरुष साक्षात्कार का अनुभव करते हैं। श्रेष्ठतम! यही वह विधि है जो ज्ञानी आत्मा को प्रकाशित करती है। 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.181.23 
बुद्धेरुत्तरकाला च वेदना दृश्यते बुधै:।
एष वै राजशार्दूल विधि: क्षेत्रज्ञभावन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि की परवर्ती अवस्थाओं में भी विद्वान् पुरुष साक्षात्कार का अनुभव करते हैं। श्रेष्ठतम! यही वह विधि है जो ज्ञानी आत्मा को प्रकाशित करती है। 23॥
 
Even in the later stages of intellectual activity, learned men experience a realization. The best! This is the method that illuminates the knowledgeable soul. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)