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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.181.16 
युधिष्ठिर उवाच
शब्दे स्पर्शे च रूपे च तथैव रसगन्धयो:।
तस्याधिष्ठानमव्यग्रो ब्रूहि सर्प यथातथम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "सर्पे! शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध का आधार क्या है? शांत हो जाओ और मुझे सच बताओ।"
 
Yudhishthira asked, "Serpent! What is the basis of sound, touch, form, taste and smell? Be calm and tell me the truth."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)