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mahabharat 3.181.1: युधिष्ठिर ने पूछा- आप समस्त वेदों और वेदांगों में पारंगत हैं। संसार में आपकी ऐसी प्रतिष्ठा है। मुझे बताइए कि किस कर्म को करने से उत्तम मोक्ष की प्राप्ति होती है?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 181: युधिष्ठिरद्वारा अपने प्रश्नोंका उचित उत्तर पाकर संतुष्ट हुए सर्परूपधारी नहुषका  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.181.1 
युधिष्ठिर उवाच
भवानेतादृशो लोके वेदवेदाङ्गपारग:।
ब्रूहि किं कुर्वत: कर्म भवेद् गतिरनुत्तमा॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- आप समस्त वेदों और वेदांगों में पारंगत हैं। संसार में आपकी ऐसी प्रतिष्ठा है। मुझे बताइए कि किस कर्म को करने से उत्तम मोक्ष की प्राप्ति होती है?॥1॥
 
Yudhishthira asked- You are well versed in all the Vedas and Vedangas. You have such a reputation in the world. Tell me, by performing which deed one can attain the best salvation?॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)